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सहीह मुस्लिम

नंबर 4562

नंबर 4562किताब 32, नंबर 43अरबी नंबरिंग 1749.05
وَحَدَّثَنَاهُ أَبُو الرَّبِيعِ، وَأَبُو كَامِلٍ قَالاَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ أَيُّوبَ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ، عَنِ ابْنِ عَوْنٍ، قَالَ كَتَبْتُ إِلَى نَافِعٍ أَسْأَلُهُ عَنِ النَّفَلِ، فَكَتَبَ إِلَىَّ أَنَّ4661 - وَحَدَّثَنَا ابْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، أَخْبَرَنِي مُوسَى، ح وَحَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ الأَيْلِيُّ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي أُسَامَةُ بْنُ زَيْدٍ، كُلُّهُمْ عَنْ نَافِعٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ نَحْوَ حَدِيثِهِمْ ‏.‏
Ibn Aun said:I wrote to Nafi' asking him about Nafl (spoils of war) and be wrote to me that Ibn 'Umar was among that expedition. (The rest of the hadith is the same)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।