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सहीह मुस्लिम

नंबर 4466

नंबर 4466किताब 29, नंबर 69अरबी नंबरिंग 1710.02
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَعَبْدُ الأَعْلَى بْنُ حَمَّادٍ كُلُّهُمْ عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، - يَعْنِي ابْنَ عِيسَى - حَدَّثَنَا مَالِكٌ، كِلاَهُمَا عَنِ الزُّهْرِيِّ، بِإِسْنَادِ اللَّيْثِ ‏.‏ مِثْلَ حَدِيثِهِ ‏.‏
A hadith like this has been transmitted on the authority of Zuhri

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · The Book of Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।