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सहीह मुस्लिम

नंबर 4465

नंबर 4465किताब 29, नंबर 68अरबी नंबरिंग 1710.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَمُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، قَالاَ أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ، ح وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ، سَعِيدٍ حَدَّثَنَا لَيْثٌ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، وَأَبِي، سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ الْعَجْمَاءُ جَرْحُهَا جُبَارٌ وَالْبِئْرُ جُبَارٌ وَالْمَعْدِنُ جُبَارٌ وَفِي الرِّكَازِ الْخُمْسُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:No requital is payable for a wound caused by an animal, for (falling into) a well and a mine, and one-fifth (is the share of the government) in the buried treasure (treasure-trove)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · The Book of Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।