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सहीह मुस्लिम

नंबर 4405

नंबर 4405किताब 29, नंबर 8अरबी नंबरिंग 1685.02
وَحَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، أَخْبَرَنَا عَبْدَةُ بْنُ سُلَيْمَانَ، وَحُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحِيمِ بْنُ سُلَيْمَانَ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، كُلُّهُمْ عَنْ هِشَامٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ نَحْوَ حَدِيثِ ابْنِ نُمَيْرٍ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، الرُّؤَاسِيِّ وَفِي حَدِيثِ عَبْدِ الرَّحِيمِ وَأَبِي أُسَامَةَ وَهُوَ يَوْمَئِذٍ ذُو ثَمَنٍ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Hisham through another chain of transmitters, and in the hadith narrated by 'Abd al-Rahim and Abu Usama (the words are):" That (the shield) was valuable those days

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · The Book of Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।