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सहीह मुस्लिम

नंबर 4337

नंबर 4337किताब 27, नंबर 84अरबी नंबरिंग 1668.03
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مِنْهَالٍ الضَّرِيرُ، وَأَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ، قَالاَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ حَسَّانَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمِثْلِ حَدِيثِ ابْنِ عُلَيَّةَ وَحَمَّادٍ ‏.‏
This hadith has been reported on the authority of Imran b. Husain through another chain of narrators

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।