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सहीह मुस्लिम

नंबर 4330

नंबर 4330किताब 27, नंबर 77अरबी नंबरिंग 1501.08
وَحَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَعْتَقَ شِرْكًا لَهُ فِي عَبْدٍ عَتَقَ مَا بَقِيَ فِي مَالِهِ إِذَا كَانَ لَهُ مَالٌ يَبْلُغُ ثَمَنَ الْعَبْدِ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar reported Allah's Apostle (ﷺ) as saying:He who gives up his share in a slave, the remaining (share) will be paid out of his riches if his riches are enough to meet the price of the slave

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।