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सहीह मुस्लिम

नंबर 4329

नंबर 4329किताब 27, नंबर 76अरबी नंबरिंग 1501.07
وَحَدَّثَنَا عَمْرٌو النَّاقِدُ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، كِلاَهُمَا عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، قَالَ ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَعْتَقَ عَبْدًا بَيْنَهُ وَبَيْنَ آخَرَ قُوِّمَ عَلَيْهِ فِي مَالِهِ قِيمَةَ عَدْلٍ لاَ وَكْسَ وَلاَ شَطَطَ ثُمَّ عَتَقَ عَلَيْهِ فِي مَالِهِ إِنْ كَانَ مُوسِرًا ‏"‏ ‏.‏
Salim b. 'Abdullah reported on the authority of his father that Allah's Apostle (ﷺ) said:He who emancipates a slave (shared) by him and another one, his full price may be justly assessed from his wealth, neither less nor more, and he (the slave) would be emancipated if he (the partner) would be solvent enough (to forgo the amount of his share)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।