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सहीह मुस्लिम

नंबर 4297

नंबर 4297किताब 27, नंबर 44अरबी नंबरिंग 1656.06
وَحَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ، حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ الْمِنْهَالِ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ أَيُّوبَ، ح وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ خَلَفٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ، كِلاَهُمَا عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، ‏.‏ بِهَذَا الْحَدِيثِ فِي النَّذْرِ وَفِي حَدِيثِهِمَا جَمِيعًا اعْتِكَافُ يَوْمٍ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Ibn Umar through another chain of transmitters but with a slight variation of words

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।