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सहीह मुस्लिम

नंबर 4296

नंबर 4296किताब 27, नंबर 43अरबी नंबरिंग 1656.05
وَحَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ الضَّبِّيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ نَافِعٍ، قَالَ ذُكِرَ عِنْدَ ابْنِ عُمَرَ عُمْرَةُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنَ الْجِعْرَانَةِ فَقَالَ لَمْ يَعْتَمِرْ مِنْهَا - قَالَ - وَكَانَ عُمَرُ نَذَرَ اعْتِكَافَ لَيْلَةٍ فِي الْجَاهِلِيَّةِ ‏.‏ ثُمَّ ذَكَرَ نَحْوَ حَدِيثِ جَرِيرِ بْنِ حَازِمٍ وَمَعْمَرٍ عَنْ أَيُّوبَ ‏.‏
Nafi' reported:A mention of Allah's Messenger (ﷺ) observing 'Umra from ja'rina was made before Ibn 'Umar. He said: He did not enter into the state of Ihram from that (place), and Umar had taken a vow of observing I'tikaf for a night during the days of Ignorance. The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।