सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 4292

नंबर 4292किताब 27, नंबर 39अरबी नंबरिंग 1656.01
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي بَكْرٍ الْمُقَدَّمِيُّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، - وَاللَّفْظُ لِزُهَيْرٍ - قَالُوا حَدَّثَنَا يَحْيَى، - وَهُوَ ابْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ - عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، قَالَ أَخْبَرَنِي نَافِعٌ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ عُمَرَ، قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي نَذَرْتُ فِي الْجَاهِلِيَّةِ أَنْ أَعْتَكِفَ لَيْلَةً فِي الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ فَأَوْفِ بِنَذْرِكَ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar reported that Umar (b. Khattab) said:Messenger of Allah, I had taken a vow during the days of Ignorance (Jahiliyya) that I would observe I'tikaf for a night in the Sacred Mosque. He (the Holy Prophet) said: Fulfil your vow

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।