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सहीह मुस्लिम

नंबर 4266

नंबर 4266किताब 27, नंबर 13अरबी नंबरिंग 1649.04
وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، وَالْقَاسِمِ، التَّمِيمِيِّ عَنْ زَهْدَمٍ الْجَرْمِيِّ، قَالَ كَانَ بَيْنَ هَذَا الْحَىِّ مِنْ جَرْمٍ وَبَيْنَ الأَشْعَرِيِّينَ وُدٌّ وَإِخَاءٌ فَكُنَّا عِنْدَ أَبِي مُوسَى الأَشْعَرِيِّ فَقُرِّبَ إِلَيْهِ طَعَامٌ فِيهِ لَحْمُ دَجَاجٍ ‏.‏ فَذَكَرَ نَحْوَهُ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Abu Musa al-Ash'ari with a slight variation of words

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।