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सहीह मुस्लिम

नंबर 4238

नंबर 4238किताब 26, नंबर 4अरबी नंबरिंग 1639.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ أَبِي حَكِيمٍ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ، دِينَارٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ النَّذْرُ لاَ يُقَدِّمُ شَيْئًا وَلاَ يُؤَخِّرُهُ وَإِنَّمَا يُسْتَخْرَجُ بِهِ مِنَ الْبَخِيلِ ‏"‏ ‏
Ibn Umar reported Allah's Apostle (ﷺ) as saying:The vow neither hastens anything nor defers anything, but is the means whereby (something) is extracted from the miserly person

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Vows

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।