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सहीह मुस्लिम

नंबर 4237

नंबर 4237किताब 26, नंबर 3अरबी नंबरिंग 1639.01
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ، زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُرَّةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، قَالَ أَخَذَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمًا يَنْهَانَا عَنِ النَّذْرِ وَيَقُولُ ‏ "‏ إِنَّهُ لاَ يَرُدُّ شَيْئًا وَإِنَّمَا يُسْتَخْرَجُ بِهِ مِنَ الشَّحِيحِ ‏"‏ ‏.‏
Abdullah b. Umar reported:Allah's Messenger (may peace he upon him) singled out one day forbidding us to take vows and said: It would not avert anything; it is by which something is extracted from the miserly person

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Vows

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।