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सहीह मुस्लिम

नंबर 4226

नंबर 4226किताब 25, नंबर 23अरबी नंबरिंग 1633
وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ الْحَفَرِيُّ، عُمَرُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ سُفْيَانَ، عَنِ ابْنِ عَوْنٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنْ عُمَرَ، قَالَ أَصَبْتُ أَرْضًا مِنْ أَرْضِ خَيْبَرَ فَأَتَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقُلْتُ أَصَبْتُ أَرْضًا لَمْ أُصِبْ مَالاً أَحَبَّ إِلَىَّ وَلاَ أَنْفَسَ عِنْدِي مِنْهَا ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمِثْلِ حَدِيثِهِمْ وَلَمْ يَذْكُرْ فَحَدَّثْتُ مُحَمَّدًا وَمَا بَعْدَهُ ‏.‏
Umar reported:I acquired land from the lands of Khaibar. I came to Allah's Messenger (ﷺ) and said: I have acquired a piece of land. Never have I acquired land more loved by me and more cherished by me than this. The rest of the hadith is the same, but he made no mention of this:" I narrated it to Muhammad" and what follows

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book of Wills

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।