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सहीह मुस्लिम

नंबर 4178

नंबर 4178किताब 24, नंबर 16अरबी नंबरिंग 1623.02
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ حُمَيْدِ بْنِ، عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَمُحَمَّدِ بْنِ النُّعْمَانِ عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ، قَالَ أَتَى بِي أَبِي إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ إِنِّي نَحَلْتُ ابْنِي هَذَا غُلاَمًا ‏.‏ فَقَالَ ‏"‏ أَكُلَّ بَنِيكَ نَحَلْتَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَارْدُدْهُ ‏"‏ ‏.‏
Nu'man b. Bashir reported:My father brought me to Allah's Messenger (ﷺ) and said: I have donated this slave to my son. whereupon he said: Have you made (such) donation to every one or your sons? He said: No. Thereupon he (the-Holy Prophet) said: Then take him back

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।