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सहीह मुस्लिम

नंबर 4059

नंबर 4059किताब 22, नंबर 98अरबी नंबरिंग 1586.01
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ مَالِكِ بْنِ أَوْسِ بْنِ الْحَدَثَانِ، أَنَّهُ قَالَ أَقْبَلْتُ أَقُولُ مَنْ يَصْطَرِفُ الدَّرَاهِمَ فَقَالَ طَلْحَةُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ وَهُوَ عِنْدَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ أَرِنَا ذَهَبَكَ ثُمَّ ائْتِنَا إِذَا جَاءَ خَادِمُنَا نُعْطِكَ وَرِقَكَ ‏.‏ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ كَلاَّ وَاللَّهِ لَتُعْطِيَنَّهُ وَرِقَهُ أَوْ لَتَرُدَّنَّ إِلَيْهِ ذَهَبَهُ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الْوَرِقُ بِالذَّهَبِ رِبًا إِلاَّ هَاءَ وَهَاءَ وَالْبُرُّ بِالْبُرِّ رِبًا إِلاَّ هَاءَ وَهَاءَ وَالشَّعِيرُ بِالشَّعِيرِ رِبًا إِلاَّ هَاءَ وَهَاءَ وَالتَّمْرُ بِالتَّمْرِ رِبًا إِلاَّ هَاءَ وَهَاءَ‏"‏ ‏.‏
मालिक बिन औस बिन हदसान से रिवायत है, वह कहते हैं : मैं यह कहते हुए आया कि हमें दीनार से दिरहम बदलकर कौन देगा? चुनांचे तलहा बिन उबैदुल्लाह ने, जो उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- के पास मौजूद थे, कहा : मुझे अपना सोना दिखाओ और उसके बाद आओ, जब हमारा सेवक आ जाएगा, तो हम तुम्हें तुम्हारी चाँदी दे देंगे। यह सुनकर उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- ने कहा : अल्लाह की क़सम, ऐसा नहीं हो सकता, या तो तुम उसे उसकी चाँदी दे दो या फिर उसका सोना वापस कर दो। क्योंकि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "चाँदी सोने के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है। गेहूँ, गेहूँ के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है। जौ, जौ के बदले में अगर नक़द न हो, तो सूद हो जाता है। खजूर, खजूर के बदले में अगर नक़द न हो, तो सूद हो जाता है।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।