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सहीह मुस्लिम

नंबर 4058

नंबर 4058किताब 22, नंबर 97अरबी नंबरिंग 1585
حَدَّثَنَا أَبُو الطَّاهِرِ، وَهَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ الأَيْلِيُّ، وَأَحْمَدُ بْنُ عِيسَى، قَالُوا حَدَّثَنَا ابْنُ، وَهْبٍ أَخْبَرَنِي مَخْرَمَةُ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ سَمِعْتُ سُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍ، يَقُولُ إِنَّهُ سَمِعَ مَالِكَ بْنَ، أَبِي عَامِرٍ يُحَدِّثُ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تَبِيعُوا الدِّينَارَ بِالدِّينَارَيْنِ وَلاَ الدِّرْهَمَ بِالدِّرْهَمَيْنِ ‏"‏ ‏.‏
Uthman b. 'Affan reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Do not sell a dinar for two dinars and one dirham for two dirhams

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।