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सहीह मुस्लिम

नंबर 3989

नंबर 3989किताब 22, नंबर 28अरबी नंबरिंग 1559.03
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ سُلَيْمَانَ، - وَهُوَ ابْنُ عِكْرِمَةَ بْنِ خَالِدٍ الْمَخْزُومِيُّ - عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، حَدَّثَنِي ابْنُ أَبِي حُسَيْنٍ، أَنَّ أَبَا بَكْرِ بْنَ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ، أَخْبَرَهُ أَنَّ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِ حَدَّثَهُ عَنْ حَدِيثِ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ حَدِيثِ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي الرَّجُلِ الَّذِي يُعْدِمُ إِذَا وُجِدَ عِنْدَهُ الْمَتَاعُ وَلَمْ يُفَرِّقْهُ ‏ "‏ أَنَّهُ لِصَاحِبِهِ الَّذِي بَاعَهُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira (Allah be pleased with him) reported Allah's Apostle (ﷺ) saying about a person who becomes insolvent and (the thing bought by him) is found intact with him, that belongs to one who sold it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।