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सहीह मुस्लिम

नंबर 3673

नंबर 3673किताब 18, नंबर 22अरबी नंबरिंग 1472.01
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، - وَاللَّفْظُ لاِبْنِ رَافِعٍ - قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ ابْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ ابْنِ طَاوُسٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَ الطَّلاَقُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَأَبِي بَكْرٍ وَسَنَتَيْنِ مِنْ خِلاَفَةِ عُمَرَ طَلاَقُ الثَّلاَثِ وَاحِدَةً فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ إِنَّ النَّاسَ قَدِ اسْتَعْجَلُوا فِي أَمْرٍ قَدْ كَانَتْ لَهُمْ فِيهِ أَنَاةٌ فَلَوْ أَمْضَيْنَاهُ عَلَيْهِمْ ‏.‏ فَأَمْضَاهُ عَلَيْهِمْ ‏.‏
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) के ज़माने में तथा उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) के ख़लीफ़ा रहने के (आरंभ के) दो सालों में (एक मजलिस) के तीन तलाक़ एक ही शुमार होते थे। फिर उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने कहाः "लोग एक ऐसे काम में जल्दी दिखा रहे हैं, जिसमें उन्हें सोच-विचार से काम लेना था। अतः, क्यों ने हम उसे लागू कर दें?" चुनांचे उन्होंने उसे उनपर लागू कर दिया। (अर्थात उन्होंने एक मजलिस की तीन तलाक को तीन मान लिया, ताकि लोग तलाक देने में अधीरता दिखाने के बजाय धैर्य से काम लें।)

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 18 · The Book of Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।