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सहीह मुस्लिम

नंबर 3559

नंबर 3559किताब 16, नंबर 161अरबी नंबरिंग 1440.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ، أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ كُنَّا نَعْزِلُ وَالْقُرْآنُ يَنْزِلُ ‏.‏ زَادَ إِسْحَاقُ قَالَ سُفْيَانُ لَوْ كَانَ شَيْئًا يُنْهَى عَنْهُ لَنَهَانَا عَنْهُ الْقُرْآنُ
Jabir (Allah be pleased with him) reported:We used to practise 'azl while the Qur'an was revealed (during the days when the Prophet was alive)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।