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सहीह मुस्लिम

नंबर 3534

नंबर 3534किताब 16, नंबर 136अरबी नंबरिंग 1434.02
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي ح، وَحَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، جَمِيعًا عَنِ الثَّوْرِيِّ، كِلاَهُمَا عَنْ مَنْصُورٍ، بِمَعْنَى حَدِيثِ جَرِيرٍ غَيْرَ أَنَّ شُعْبَةَ لَيْسَ فِي حَدِيثِهِ ذِكْرُ ‏"‏ بِاسْمِ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ عَبْدِ الرَّزَّاقِ عَنِ الثَّوْرِيِّ ‏"‏ بِاسْمِ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ ابْنِ نُمَيْرٍ قَالَ مَنْصُورٌ أُرَاهُ قَالَ ‏"‏ بِاسْمِ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏
This hadith is narrated through another chain of transmitters and there is no mention of (the words)" Bismillah" (In the name of Allah) in it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।