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सहीह मुस्लिम

नंबर 3532

नंबर 3532किताब 16, नंबर 134अरबी नंबरिंग 1433.07
وَحَدَّثَنَاهُ مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي ح، وَحَدَّثَنَاهُ مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا يَحْيَى، - يَعْنِي ابْنَ سَعِيدٍ - جَمِيعًا عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ مِثْلَهُ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ يَحْيَى عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ عَنْ عَائِشَةَ ‏.‏
A hadith like this has been narrated on the same chain of transmitters by 'A'isha (Allah be pleased with her)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।