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सहीह मुस्लिम

नंबर 3531

नंबर 3531किताब 16, नंबर 133अरबी नंबरिंग 1433.06
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ طَلَّقَ رَجُلٌ امْرَأَتَهُ ثَلاَثًا فَتَزَوَّجَهَا رَجُلٌ ثُمَّ طَلَّقَهَا قَبْلَ أَنْ يَدْخُلَ بِهَا فَأَرَادَ زَوْجُهَا الأَوَّلُ أَنْ يَتَزَوَّجَهَا فَسُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ ‏ "‏ لاَ حَتَّى يَذُوقَ الآخِرُ مِنْ عُسَيْلَتِهَا مَا ذَاقَ الأَوَّلُ ‏"‏ ‏.‏
आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि एक व्यक्ति ने अपनी स्त्री को तीन तलाक़ दे दिया और एक अन्य व्यक्ति ने उससे निकाह कर लिया। परन्तु उसने भी उसके साथ संभोग करने से पहले उसे तलाक़ दे दिया। ऐसे में, उसके पहले पति ने उससे निकाह करने की मंशा जताई। लेकिन जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से इसके बारे में पूछा गया, तो आपने फ़रमायाः "नहीं, ऐसा उस समय तक नहीं हो सकता, जब तक पहले पति की तरह दूसरा पति भी उसका मज़ा न चख ले।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।