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सहीह मुस्लिम

नंबर 3404

नंबर 3404किताब 16, नंबर 7अरबी नंबरिंग 1402.01
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ - وَاللَّفْظُ لَهُ - أَخْبَرَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ، الْمُسَيَّبِ عَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ، قَالَ رَدَّ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى عُثْمَانَ بْنِ مَظْعُونٍ التَّبَتُّلَ وَلَوْ أَذِنَ لَهُ لاَخْتَصَيْنَا ‏.‏
साद बिन अबू वक्कास (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसमान बिन मज़ऊन के विवाहित जीवन से अलग होकर इबादत में लगे रहने के इरादे को नकार दिया था। यदि उन्हें अनुमति दे देते तो हम पूरे तौर पर विवाहित जीवन से अलग होकर इबादत में लग जाते।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।