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सहीह मुस्लिम

नंबर 3165

नंबर 3165किताब 15, नंबर 369अरबी नंबरिंग 1308
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَفَاضَ يَوْمَ النَّحْرِ ثُمَّ رَجَعَ فَصَلَّى الظُّهْرَ بِمِنًى ‏.‏ قَالَ نَافِعٌ فَكَانَ ابْنُ عُمَرَ يُفِيضُ يَوْمَ النَّحْرِ ثُمَّ يَرْجِعُ فَيُصَلِّي الظُّهْرَ بِمِنًى وَيَذْكُرُ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَعَلَهُ ‏.‏
Ibn Umar reported that Allah's Messenger (ﷺ) observed the circumambulation of Ifada on the Day of Nabr (10th of Dhu'l-Hijja), and then came back and observed the noon prayer at Mina. Nafi' (one of the narrators) said that Ibn Umar used to observe the circumambulation of Ifada on the Day of Nahr, and then return and observe the noon prayer at Mina, and mentioned that Allah's Apostle (ﷺ) did that

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।