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सहीह मुस्लिम

नंबर 3125

नंबर 3125किताब 15, नंबर 329अरबी नंबरिंग 1292.02
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ، ح وَحَدَّثَنَا عَمْرٌو النَّاقِدُ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ سَالِمِ بْنِ شَوَّالٍ، عَنْ أُمِّ، حَبِيبَةَ قَالَتْ كُنَّا نَفْعَلُهُ عَلَى عَهْدِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نُغَلِّسُ مِنْ جَمْعٍ إِلَى مِنًى ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ النَّاقِدِ نُغَلِّسُ مِنْ مُزْدَلِفَةَ ‏.‏
It is narrated from Umm Habiba:We used to set forth from Muzdalifa to Mina, (very early in the dawn) when it was dark. And in the narration of Naqid (the words are):" We set from Muzdalifa in the darkness (of the dawn)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।