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सहीह मुस्लिम

नंबर 3071

नंबर 3071किताब 15, नंबर 277अरबी नंबरिंग 1271.01
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، جَمِيعًا عَنْ وَكِيعٍ، - قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، - عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ الأَعْلَى، عَنْ سُوَيْدِ بْنِ غَفَلَةَ، قَالَ رَأَيْتُ عُمَرَ قَبَّلَ الْحَجَرَ وَالْتَزَمَهُ وَقَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِكَ حَفِيًّا ‏.‏
Suwaid b. Ghafala reported:I saw Umar (Allah be pleased with him) kissing the Stone and clinging to it and saying: I saw Allah's Messenger (ﷺ) having great love for you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।