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सहीह मुस्लिम

नंबर 3070

नंबर 3070किताब 15, नंबर 276अरबी नंबरिंग 1270.04
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَابْنُ نُمَيْرٍ جَمِيعًا عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ، - قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، - عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَابِسِ، بْنِ رَبِيعَةَ قَالَ رَأَيْتُ عُمَرَ يُقَبِّلُ الْحَجَرَ وَيَقُولُ إِنِّي لأُقَبِّلُكَ وَأَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ وَلَوْلاَ أَنِّي رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُقَبِّلُكَ لَمْ أُقَبِّلْكَ ‏.‏
Abis b. Rabi'a reported:I saw 'Umar (Allah'be pleased with him) kissing the Stone and saying: I am kissing you and I know that you are a stone. And if I had not seen Allah's Messenger (ﷺ) kissing you, I would not have kissed you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।