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सहीह मुस्लिम

नंबर 3065

नंबर 3065किताब 15, नंबर 271अरबी नंबरिंग 1268.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ جَمِيعًا عَنْ أَبِي خَالِدٍ، - قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الأَحْمَرُ، - عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، قَالَ رَأَيْتُ ابْنَ عُمَرَ يَسْتَلِمُ الْحَجَرَ بِيَدِهِ ثُمَّ قَبَّلَ يَدَهُ وَقَالَ مَا تَرَكْتُهُ مُنْذُ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَفْعَلُهُ ‏.‏
NAfi' (Allah be pleased with him) reported:I saw'lbn 'Umar (Allah be pleased with them) touching the Stone with his hand and then kissing his hand. and he said: I have never abandoned it since I saw Allah's Messenger (way peace be upon him) doing It

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।