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सहीह मुस्लिम

नंबर 3041

नंबर 3041किताब 15, नंबर 247अरबी नंबरिंग 1257.02
وَحَدَّثَنِيهِ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالاَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، - وَهُوَ الْقَطَّانُ - عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ وَقَالَ فِي رِوَايَةِ زُهَيْرٍ الْعُلْيَا الَّتِي بِالْبَطْحَاءِ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of 'Ubaidullah with the same chain of transmitters and in the narration transmitted by Zubair (it is mentioned) that the upper side is that'which is at al-Batha

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।