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सहीह मुस्लिम

नंबर 2868

नंबर 2868किताब 15, नंबर 78अरबी नंबरिंग 1199.01
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، قَالَ زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، - رضى الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ خَمْسٌ لاَ جُنَاحَ عَلَى مَنْ قَتَلَهُنَّ فِي الْحَرَمِ وَالإِحْرَامِ الْفَارَةُ وَالْعَقْرَبُ وَالْغُرَابُ وَالْحِدَأَةُ وَالْكَلْبُ الْعَقُورُ ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ ابْنُ أَبِي عُمَرَ فِي رِوَايَتِهِ ‏"‏ فِي الْحُرُمِ وَالإِحْرَامِ ‏"‏ ‏.‏
Salim reported on the authority of his father (Allah be pleased with them) that the Messenger of Allah (ﷺ) said:Five are the (beasts) which if one kills them in the precincts of the Ka'ba or in the state of lhram entail no sin: rat, scorpion, crow, kite and voracious dog. In another version the words are:" as a Muhrim and in the state of lhram

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।