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सहीह मुस्लिम

नंबर 2713

नंबर 2713किताब 13, नंबर 219अरबी नंबरिंग 1153.03
وَحَدَّثَنِي إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ بِشْرٍ الْعَبْدِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، وَسُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ، أَنَّهُمَا سَمِعَا النُّعْمَانَ بْنَ، أَبِي عَيَّاشٍ الزُّرَقِيَّ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، - رضى الله عنه - قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَنْ صَامَ يَوْمًا فِي سَبِيلِ اللَّهِ بَاعَدَ اللَّهُ وَجْهَهُ عَنِ النَّارِ سَبْعِينَ خَرِيفًا ‏"‏ ‏.‏
अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : "जो अल्लाह के पथ में एक दिन रोज़ा रखेगा, उसके चेहरे को अल्लाह (जहन्नम की) आग से सत्तर साल दूर कर देगा।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 13 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।