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सहीह मुस्लिम

नंबर 2492

नंबर 2492किताब 12, नंबर 229अरबी नंबरिंग 1078.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَمْرٌو النَّاقِدُ وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا وَكِيعٌ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ، قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ أَبِي أَوْفَى، ح . وَحَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ عَمْرٍو، - وَهُوَ ابْنُ مُرَّةَ - حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي أَوْفَى، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا أَتَاهُ قَوْمٌ بِصَدَقَتِهِمْ قَالَ ‏"‏ اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَيْهِمْ ‏"‏ ‏.‏ فَأَتَاهُ أَبِي أَبُو أَوْفَى بِصَدَقَتِهِ فَقَالَ ‏"‏ اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى آلِ أَبِي أَوْفَى ‏"‏ ‏.‏
Abdullah b. Abu Aufa said that it was the common practice of the Messenger of Allah (ﷺ) that when the people brought to him sadaqa he blessed them:O Allah, bless them. So when Abu Aufa brought to him Sadaqa he (the Holy Prophet) said: O Allah, bless, the posterity of Abu Aufa

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।