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सहीह मुस्लिम

नंबर 2491

नंबर 2491किताब 12, नंबर 228अरबी नंबरिंग 1077
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ سَلاَّمٍ الْجُمَحِيُّ، حَدَّثَنَا الرَّبِيعُ، - يَعْنِي ابْنَ مُسْلِمٍ - عَنْ مُحَمَّدٍ، - وَهُوَ ابْنُ زِيَادٍ - عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، ‏.‏ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا أُتِيَ بِطَعَامٍ سَأَلَ عَنْهُ فَإِنْ قِيلَ هَدِيَّةٌ أَكَلَ مِنْهَا وَإِنْ قِيلَ صَدَقَةٌ لَمْ يَأْكُلْ مِنْهَا ‏.‏
Abu Huraira reported:Whenever the Messenger of Allah (ﷺ) was presented with food, he asked about it, If he was told that it was a gift, he ate out of that, and if he was told that it was a sadaqa he did not eat out of that

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।