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सहीह मुस्लिम

नंबर 2417

नंबर 2417किताब 12, नंबर 154अरबी नंबरिंग 1048.03
وَحَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنِي ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ لَوْ كَانَ لاِبْنِ آدَمَ وَادٍ مِنْ ذَهَبٍ أَحَبَّ أَنَّ لَهُ وَادِيًا آخَرَ وَلَنْ يَمْلأَ فَاهُ إِلاَّ التُّرَابُ وَاللَّهُ يَتُوبُ عَلَى مَنْ تَابَ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:If there were two valleys of gold for the son of Adam, he would long for another one. and his mouth will not be filled but with dust, and Allah returns to him who repents

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।