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सहीह मुस्लिम

नंबर 2416

नंबर 2416किताब 12, नंबर 153अरबी नंबरिंग 1048.02
وَحَدَّثَنَا ابْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالَ ابْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ، يُحَدِّثُ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ - فَلاَ أَدْرِي أَشَىْءٌ أُنْزِلَ أَمْ شَىْءٌ كَانَ يَقُولُهُ - بِمِثْلِ حَدِيثِ أَبِي عَوَانَةَ ‏.‏
Anas b. Malik reported:I heard the Messenger of Allah (ﷺ) as saying this, but I do not know whether this thing was revealed to him or not, but he said to

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।