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सहीह मुस्लिम

नंबर 2399

नंबर 2399किताब 12, नंबर 136अरबी नंबरिंग 1041
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، وَوَاصِلُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ، الْقَعْقَاعِ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ سَأَلَ النَّاسَ أَمْوَالَهُمْ تَكَثُّرًا فَإِنَّمَا يَسْأَلُ جَمْرًا فَلْيَسْتَقِلَّ أَوْ لِيَسْتَكْثِرْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:He who begs the riches of others to increase his own is asking only for live coals, so let him ask a little or much

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।