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सहीह मुस्लिम

नंबर 2398

नंबर 2398किताब 12, नंबर 135अरबी नंबरिंग 1040.03
حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي اللَّيْثُ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ، أَبِي جَعْفَرٍ عَنْ حَمْزَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَاهُ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا يَزَالُ الرَّجُلُ يَسْأَلُ النَّاسَ حَتَّى يَأْتِيَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَيْسَ فِي وَجْهِهِ مُزْعَةُ لَحْمٍ ‏"‏ ‏.‏
Hamza b. 'Abdullah b. Umar heard his father say that the Messenger of Allah (ﷺ) had said:The person would continue begging from people till he would come on the Day of Resurrection and there would be no flesh on his face

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।