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सहीह मुस्लिम

नंबर 2376

नंबर 2376किताब 12, नंबर 113अरबी नंबरिंग 1029.02
وَحَدَّثَنَا عَمْرٌو النَّاقِدُ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، جَمِيعًا عَنْ أَبِي، مُعَاوِيَةَ - قَالَ زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ خَازِمٍ، - حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ، عَنْ عَبَّادِ بْنِ حَمْزَةَ، وَعَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ الْمُنْذِرِ، عَنْ أَسْمَاءَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ انْفَحِي - أَوِ انْضَحِي أَوْ أَنْفِقِي - وَلاَ تُحْصِي فَيُحْصِيَ اللَّهُ عَلَيْكِ وَلاَ تُوعِي فَيُوعِيَ اللَّهُ عَلَيْكِ ‏"‏ ‏.‏
Asma' reported Allah's Messenger (way peace be upon him) as saying (to her):Spend and do not calculate, (for) Allah would calculate in your case; and do not hoard, otherwise Allah would be withholding from you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।