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सहीह मुस्लिम

नंबर 2375

नंबर 2375किताब 12, नंबर 112अरबी नंबरिंग 1029.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا حَفْصٌ، - يَعْنِي ابْنَ غِيَاثٍ - عَنْ هِشَامٍ، عَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ الْمُنْذِرِ، عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ أَبِي بَكْرٍ، - رضى الله عنها - قَالَتْ قَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَنْفِقِي - أَوِ انْضَحِي أَوِ انْفَحِي - وَلاَ تُحْصِي فَيُحْصِيَ اللَّهُ عَلَيْكِ ‏"‏ ‏.‏
Asma', daughter of Abu Bakr (Allah be pleased with him), reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said to me: Spend, and do not calculate, or otherwise Allah would also calculate in your case

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।