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सहीह मुस्लिम

नंबर 2332

नंबर 2332किताब 12, नंबर 69अरबी नंबरिंग 1007.03
وَحَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ نَافِعٍ الْعَبْدِيُّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ كَثِيرٍ، حَدَّثَنَا عَلِيٌّ، - يَعْنِي ابْنَ الْمُبَارَكِ - حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ زَيْدِ بْنِ سَلاَّمٍ، عَنْ جَدِّهِ أَبِي سَلاَّمٍ، قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ، بْنُ فَرُّوخَ أَنَّهُ سَمِعَ عَائِشَةَ، تَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ خُلِقَ كُلُّ إِنْسَانٍ ‏"‏ ‏.‏ بِنَحْوِ حَدِيثِ مُعَاوِيَةَ عَنْ زَيْدٍ ‏.‏ وَقَالَ ‏"‏ فَإِنَّهُ يَمْشِي يَوْمَئِذٍ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated by 'A'isha through anothr chain of transmitters in which she reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:" Every man is created" ; the rest of the hadith is the same and he said:" He walks on that day

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।