सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 2331

नंबर 2331किताब 12, नंबर 68अरबी नंबरिंग 1007.02
وَحَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ، أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ حَسَّانَ، حَدَّثَنِي مُعَاوِيَةُ، أَخْبَرَنِي أَخِي، زَيْدٌ بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ مِثْلَهُ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ ‏"‏ أَوْ أَمَرَ بِمَعْرُوفٍ ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ ‏"‏ فَإِنَّهُ يُمْسِي يَوْمَئِذٍ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Zaid with the same chain of transmitters except with (a slight) change of words (i.e. he [the Holy Prophet]) said:Or he enjoined what is good, ... and said: He enters the evening [i.e. he walks till evening]

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।