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सहीह मुस्लिम

नंबर 2326

नंबर 2326किताब 12, नंबर 63अरबी नंबरिंग 1004.01
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ رَجُلاً، أَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ أُمِّيَ افْتُلِتَتْ نَفْسَهَا وَلَمْ تُوصِ وَأَظُنُّهَا لَوْ تَكَلَّمَتْ تَصَدَّقَتْ أَفَلَهَا أَجْرٌ إِنْ تَصَدَّقْتُ عَنْهَا قَالَ ‏ "‏ نَعَمْ ‏"‏.‏
A'isha said that a person came to the Messenger of Allah (ﷺ) and said:My mother died suddenly without having made any will. I think she would have definitely given Sadaqa if she had been able to speak. Would she have a reward if I gave Sadaqa on her behalf? He (the Holy Prophet) said: Yes

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।