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सहीह मुस्लिम

नंबर 2325

नंबर 2325किताब 12, नंबर 62अरबी नंबरिंग 1003.02
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ أَبِي بَكْرٍ، قَالَتْ قَدِمَتْ عَلَىَّ أُمِّي وَهِيَ مُشْرِكَةٌ فِي عَهْدِ قُرَيْشٍ إِذْ عَاهَدَهُمْ فَاسْتَفْتَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَدِمَتْ عَلَىَّ أُمِّي وَهْىَ رَاغِبَةٌ أَفَأَصِلُ أُمِّي قَالَ ‏ "‏ نَعَمْ صِلِي أُمَّكِ ‏"‏ ‏.‏
Asma' bint Abu Bakr reported:My mother who was a polytheist came to me when he (the Holy Prophet) entered into treaty with, the Quraish (of Mecca). I inquired from the Messenger of Allah (ﷺ) saying: Messenger of Allah, there has come to me my mother and she is inclined; should I (in this state of her mind) show her kindness? He said: Yes, treat her kindly

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।