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सहीह मुस्लिम

नंबर 2320

नंबर 2320किताब 12, नंबर 57अरबी नंबरिंग 1001.01
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ زَيْنَبَ بِنْتِ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، قَالَتْ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَلْ لِي أَجْرٌ فِي بَنِي أَبِي سَلَمَةَ أُنْفِقُ عَلَيْهِمْ وَلَسْتُ بِتَارِكَتِهِمْ هَكَذَا وَهَكَذَا إِنَّمَا هُمْ بَنِيَّ ‏.‏ فَقَالَ ‏ "‏ نَعَمْ لَكِ فِيهِمْ أَجْرُ مَا أَنْفَقْتِ عَلَيْهِمْ ‏"‏ ‏.‏
Umm Salama said:I asked the Messenger of Allah (ﷺ) whether there is a reward for me if I spend on Abu Salama's sons, and I am not going to abandon them in this state (of helplessness) for they are my sons. He (the Holy Prophet) said: Yes. For you is the reward for what you spend on them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।