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सहीह मुस्लिम

नंबर 2319

नंबर 2319किताब 12, नंबर 56अरबी नंबरिंग 1000.02
حَدَّثَنِي أَحْمَدُ بْنُ يُوسُفَ الأَزْدِيُّ، حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصِ بْنِ غِيَاثٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، حَدَّثَنِي شَقِيقٌ، عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ زَيْنَبَ، امْرَأَةِ عَبْدِ اللَّهِ ‏.‏ قَالَ فَذَكَرْتُ لإِبْرَاهِيمَ فَحَدَّثَنِي عَنْ أَبِي عَبَيْدَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ عَنْ زَيْنَبَ امْرَأَةِ عَبْدِ اللَّهِ ‏.‏ بِمِثْلِهِ سَوَاءً قَالَ قَالَتْ كُنْتُ فِي الْمَسْجِدِ فَرَآنِي النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ تَصَدَّقْنَ وَلَوْ مِنْ حُلِيِّكُنَّ ‏"‏ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِنَحْوِ حَدِيثِ أَبِي الأَحْوَصِ ‏.‏
A hadith like this has been narrated on the authority of Zainab the wife of 'Abdullah, and she said:I was in the mosque and the Prophet of Allah (ﷺ) saw me and said: Give Sadaqa even though it is out of your jewellery. The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।