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सहीह मुस्लिम

नंबर 2272

नंबर 2272किताब 12, नंबर 10अरबी नंबरिंग 981
حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، أَحْمَدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ سَرْحٍ وَهَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ الأَيْلِيُّ وَعَمْرُو بْنُ سَوَّادٍ وَالْوَلِيدُ بْنُ شُجَاعٍ كُلُّهُمْ عَنِ ابْنِ وَهْبٍ، قَالَ أَبُو الطَّاهِرِ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ، أَنَّ أَبَا الزُّبَيْرِ، حَدَّثَهُ أَنَّهُ، سَمِعَ جَابِرَ بْنَ، عَبْدِ اللَّهِ يَذْكُرُ أَنَّهُ سَمِعَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ فِيمَا سَقَتِ الأَنْهَارُ وَالْغَيْمُ الْعُشُورُ وَفِيمَا سُقِيَ بِالسَّانِيَةِ نِصْفُ الْعُشْرِ ‏"‏ ‏.‏
Jabir b. Abdullah reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:A tenth is payable on what is watered by rivers, or rains, and a twentieth on what is watered by camels

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।