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सहीह मुस्लिम

नंबर 2115

नंबर 2115किताब 10, नंबर 24अरबी नंबरिंग 911.02
وَحَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ الْعَنْبَرِيُّ، وَيَحْيَى بْنُ حَبِيبٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ، عَنْ قَيْسٍ، عَنْ أَبِي مَسْعُودٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ لَيْسَ يَنْكَسِفَانِ لِمَوْتِ أَحَدٍ مِنَ النَّاسِ وَلَكِنَّهُمَا آيَتَانِ مِنْ آيَاتِ اللَّهِ فَإِذَا رَأَيْتُمُوهُ فَقُومُوا فَصَلُّوا ‏"‏ ‏.‏
Abu Mas'ud reported that the Messenger of Allah (ﷺ) said:Verily the sun and the moon do not eclipse on account of the death of any one of the people, but they are the two signs among the signs of Allah. So when you see it, stand up and observe prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · The Book of Prayer - Eclipses

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।