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सहीह मुस्लिम

नंबर 351

नंबर 351किताब 1, नंबर 258अरबी नंबरिंग 136.01
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَامِرِ بْنِ زُرَارَةَ الْحَضْرَمِيُّ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ، عَنْ مُخْتَارِ بْنِ فُلْفُلٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ إِنَّ أُمَّتَكَ لاَ يَزَالُونَ يَقُولُونَ مَا كَذَا مَا كَذَا حَتَّى يَقُولُوا هَذَا اللَّهُ خَلَقَ الْخَلْقَ فَمَنْ خَلَقَ اللَّهَ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik transmitted it from the Messenger of Allah (ﷺ) that the Great and Glorious Allah said:Verily your people would constantly question about this and that till they would say: Well, it is Allah Who created the creation, but who created Allah?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।