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सहीह मुस्लिम

नंबर 295

नंबर 295किताब 1, नंबर 201अरबी नंबरिंग 106.03
وَحَدَّثَنِيهِ بِشْرُ بْنُ خَالِدٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، - يَعْنِي ابْنَ جَعْفَرٍ - عَنْ شُعْبَةَ، قَالَ سَمِعْتُ سُلَيْمَانَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ ‏ "‏ ثَلاَثَةٌ لاَ يُكَلِّمُهُمُ اللَّهُ وَلاَ يَنْظُرُ إِلَيْهِمْ وَلاَ يُزَكِّيهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ ‏"‏ ‏.‏
Bishr b. Khalid has narrated this hadith on the authority of Sulaiman with the same chain of transmitters with this addition:Allah shall neither speak nor look at nor absolve then, and there is a tormenting punishment for them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।